Wednesday, 3 August 2016

नागर विमानन नीति, 2016 को मंत्रिमंडलीय मंजूरी


भारत में वायु परिवहन सेवा का प्रारंभ वर्ष 1911 में हुआ था। वर्ष 1933 में इंडियन नेशनल एयरवेज की स्थापना हुई थी। वर्ष 1953 में सभी वैमानिक कंपनियों का राष्ट्रीयकरण करके उन्हें दो निगमों के अधीन रखा गया। देश के भीतरी भागों में विमान सेवाओं के संचालन के लिए ‘भारतीय विमान निगम’ (Indian Airlines Corporation) तथा देश के दूसरे वैमानिक निगम ‘एयर इंडिया’ (Air India) की स्थापना विदेशों के लिए विमान सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु की गई।
15 जून, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में नई नागर विमानन नीति को मंजूरी प्रदान की गई। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यह पहला अवसर है जब नागर विमानन मंत्रालय द्वारा संपूर्ण नागर विमानन नीति लाई गई है। नई नीति में 5/20 नियम में बदलाव किया गया है। इस नियम के तहत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन करने के लिए किसी भी घरेलू कंपनी के पास घरेलू मार्ग पर कम से कम 5 वर्ष संचालन का अनुभव और 20 विमानों के बेड़े की शर्त है। नई नीति में 5 वर्ष के अनुभव की शर्त हटा दी गई है, लेकिन विमानन कंपनी को कम से कम 20 विमान रखना होगा और 20 फीसदी उड़ानों का संचालन घरेलू मार्ग पर करना होगा। इसका उद्देश्य छोटे शहरों व कस्बों में एयरलाइंस कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है। नागर विमानन नीति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं-
  • भारत को वर्ष 2022 तक 9वें स्थान से तीसरा सबसे बड़ा नागर विमानन बाजार बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • घरेलू टिकटिंग को वर्ष 2015 में 8 करोड़ से बढ़ाकर वर्ष 2022 तक 30 करोड़ करना।
  • वाणिज्यिक उड़ानों के लिए हवाई अड्डों की संख्या वर्ष 2019 तक 127 करना जो वर्ष 2016 में 77 हैं।
  • मालवाहक सामान की मात्रा को वर्ष 2007 तक 4 गुना बढ़ाकर 10 मिलियन टन करना।
  • यात्रियों को 1 घंटे की यात्रा के लिए 2500 रुपये का भुगतान करना होगा तथा आधे (½) घंटे की यात्रा के लिए 1200 रुपये देना होगा।
  • रख-रखाव और मरम्मत संचालन को प्रोत्साहन देकर दक्षिण एशिया में प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना।
  • ग्रीन फील्ड हवाई अड्डों और हेलीकॉप्टर अड्डों का विकास किया जाएगा।
  • नियमों में ढील, आसान प्रक्रिया और ई-गवर्नेंस द्वारा व्यापार करने को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • नागर विमानन क्षेत्र में एयर इंडिया को प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।
  • नई विमानन नीति के अंतर्गत-क्षेत्रीय संपर्क, सुरक्षा, हवाई परिवहन संचालन, रूट प्रसार दिशा-निर्देश, अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए 5/20 की आवश्यकता, द्विपक्षीय यातायात अधिकार, कोड शेयरिंग समझौते, राजकोषीय समर्थन, राज्य सरकार, निजी क्षेत्र द्वारा या पीपीपी मोड में विकसित हवाई अड्डे, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, वायु नौवहन सेवाएं, विमान सुरक्षा आव्रजन और सीमा शुल्क, हेलीकॉप्टर, चार्टर्स, रख-रखाव व मरम्मत, भू-प्रबंधन, एयर कार्गो, वैमानिकी, मेक इन इंडिया, विमान शिक्षा और कौशल विकास, सतत विमानन आदि क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
  • मेट्रो शहरों के बीच उड़ान भरने वालों से रीजनल कनेक्टिविटी शुल्क वसूला जाएगा।
  • एयरपोर्ट अथॉरिटी को नुकसान से बचाने के लिए एआई (Air India) के एयरपोर्ट से 150 किमी. के भीतर दूसरा एयरपोर्ट बनाए जाने पर मुआवजा देने का प्रावधान है।
  • द्विपक्षीय अधिकारों (वायलैटरल राइट्स) पर अंतिम फैसला कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी।
  • हेलीकॉप्टर सेवाओं, ग्राउंड हैंडलिंग सेवाओं को बढ़ावा देने के उपाय किए गए हैं।
  • निषिद्ध क्षेत्र के बाहर 500 फीट की ऊंचाई तक हेलीकॉप्टर उड़ानों के लिए एटीसी (एअर ट्रैफिक कंट्रोल) की अनुमति आवश्यक नहीं होगी।
  • ग्राउंड हैंडलिंग पॉलिसी के तहत प्रत्येक एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की एजेंसी समेत कम से कम तीन ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसियां होंगी।
  • दक्षेस देशों तथा भारत से 5000 किमी. दायरे से बाहर के देशों के लिए पारस्परिक आधार पर ओपन स्काई नीति लागू होगी।
  • विमानन कंपनी यदि कोई फ्लाइट रद्द करती है, तो उसे इसकी सूचना ग्राहकों को 2 महीने पहले देनी होगी और पूरा रिफंड भी करना होगा।
  • टिकट कैंसिल कराने के मामले में घरेलू हवाई यात्रा के लिए 15 दिन और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा के लिए 30 दिनों के भीतर रिफंड करना होगा।
  • विमान में यात्रा के दौरान 15 किग्रा. तक सामान ले जाने की छूट है। इससे ज्यादा पर प्रत्येक 1 किग्रा. पर 100 रु. देने होंगे।
  • घरेलू शिड्यूल्ड एयर लाइनों को अपनी स्वयं की एजेंसी रखने की छूट प्राप्त होगी।

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